महाविद्यालय में प्राचीन भारत में भौगोलिक ज्ञान का विकास पर अतिथि व्याख्यान
भूगोल विभाग द्वारा "प्राचीन भारत में भौगोलिक ज्ञान का विकास” विषय पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में श्री चंदन सिंह राठौर प्राध्यापक भूगोल शासकीय नवीन महाविद्यालय ठेलकाडीह उपस्थित रहे। व्याख्यान का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा से विद्यार्थियों को अवगत कराना। इस व्याख्यान में विद्यार्थियों को प्राचीन भारत में भौगोलिक दृष्टिकोण, मानचित्रण, स्थलाकृतिक ज्ञान और उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
अतिथि व्याख्यान का संचालन डॉ. मिली चंद्राकर ने किया। उन्होंने प्राचीन भारतीय ग्रंथों, भौगोलिक खोजों और इतिहास के संदर्भों का उदाहरण देकर बताया कि कैसे भारत में प्रारंभिक काल से ही स्थानिक और प्राकृतिक विशेषताओं का अध्ययन किया जाता रहा। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि प्राचीन भौगोलिक ज्ञान ने व्यापार, कृषि, जल व्यवस्थापन और सामाजिक संरचनाओं के विकास में किस प्रकार योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से प्रश्न पूछे और अपने जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. दीपिका, भूगोल विभाग की विभागाध्यक्ष श्रीमति दीपिका कंवर, वाणिज्य विभागाध्यक्ष श्री मोहित साव, समस्त प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे ।